राष्ट्रपति पर भड़के पत्रकार, कहा आप जैसे गुलामों को इतिहास में चमचा ही कहा जाएगा
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आपको बता दे कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को न्योता नही भेजा गया था जब मुख्य अतिथि के रूप प्रधानमंत्री मोदी वहाँ मौजूद थे।
भूमिपूजन में नहीं दिखे आडवाणी और जोशी
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित राम जन्मभूमि आंदोलन के कई नेता आज के भूमि पूजन में आयोजन स्थल पर नहीं थे। कोरोना महामारी के मद्देनजर आयोजकों ने मेहमानों की सूची छोटी रखी और सिर्फ 175 लोगों को आमंत्रित किया था। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद थे। मोदी ने कहा कि श्रीराम ने सामाजिक समरसता को अपने शासन की आधारशिला बनाया था.
करीब 500 सालों तक चले विवाद और हिंदुस्तान के इतिहास की सबसे लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 5 August को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि में भव्य मंदिर (Ram Temple Construction updates) के लिए भूमिपूजन हुआ। राम मंदिर की आधारशिला रखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राम सबके हैं और सबमें हैं। मंदिर के भूमिपूजन (Ram Mandir Bhumi Pujan) के साथ ही भारत के सबसे चर्चित और लंबे वक्त तक चले विवाद के एक तरह से पूरी तरह खत्म होने का ऐलान करते हुए उन्होंने भाईचारे का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राम का सब जगह होना भारत की विविधता में एकता का जीवन चरित्र है। हालांकि, असदुद्दीन ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से भूमिपूजन में पीएम मोदी के शामिल होने पर सवाल उठाते हुए नया विवाद पैदा करने की कोशिश जरूर की जा रही है।

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